পাগল মন

মনটা যে আজ উড়তেই চায়,
হারিয়ে যেতে যেন পায়।
দিনের প্রভাতে রবির আলোকে,
উধাও হবে সে এক পলকে।

হলুদ-নীল আলোর মালা তে,
উড়ে-উড়ে সে কোথাযে যাবেরে।
বাঁধতে যেও না তাকে তুমি আজ,
শুনে শুধু কারো কথা তে।

মনটা তো আজ উধাও হবে যে,
বেঁধো না তাকে তুমি কোনো শর্তে ।
পাপের সাজা সে পাবেনা ঘরেতে ,
উড়তে দাও তাকে রবির আলোকে ।

স্বার্থ-পরতা নয় তো এটা যে,
নিজের প্রতি কর্তব্যের খাতিরে

উড়তে দাও তুমি একান্তে আনমনে,
বিশ্ব শান্তির শর্ত পালনে ।

মনটা যে আজ উধাও হবেযে,
দিনের প্রভাতে আড়ালে-আবডালে ।
হারিয়ে যাক্ সে কোন অজান্তে ,
খুশির ঠিকানা পাক না দিনান্তে।

বেঁধোনা তাকে তুমি আজ…
রেখোনা তার কোনো কাজ…
মনটা যে আজ উড়তেই চায়,
উধাও হতে যেনো পায় …..।

পঁচিশে বৈশাখ

সুপ্রভাত—

আজ পঁচিশে বৈশাখ 1428 বঙ্গাব্দ, রবিবার। বিশ্ব সাহিত্যের শ্রেষ্ঠ ঔপন্যাসিক, নাট্যকার,কাহিনীকার,কাব্যকার,চিত্রকার……কবিগুরু রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরের জন্ম বার্ষিকী। এই উপলক্ষ্যে আজ আমি কিছু বলতে চাই । এমনিতেই তো কবিগুরুর বিশাল প্রতিভার সম্পর্কে সবার সবকিছু জ্ঞাত।

নতুন করে কিছু বলার নেই ।
তাই বাঁধন ছাড়া কিছু কথা লিখছি ।

“রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরের নামকরণ করা কিছু ফুল-“

রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরের পুষ্প ও উদ্ভিদ প্রেম নিয়ে নতুন করে কিছু বলার অবকাশ রাখেনা। তার কাব্যে ১০৭ টি ফুলের উল্লেখ আছে। তার গান, কাব্য, কবিতায় বাংলার অজস্র দেশী- বিদেশী ফল, ফুলের চর্চা রয়েছে। গুরুদেব শান্তিনিকেতনকে সবুজ করে তুলতে শুরু করেছিলেন বর্ষামঙ্গল, হলকর্ষণ ও বৃক্ষরোপণ উৎসবের মাধ্যমে। বিশ্বভ্রমনকালে দেশ-বিদেশ হতে বহু ফুল ও গাছ তিনি এনেছেন শান্তিনিকেতনে। বিশ্বভ্রমনকালে বহু বিদেশী ফুল যেমন রডোডেনড্রন ও ক্যামেলিয়াকে নিয়েও তিনি লিখেছেন তার “শেষের কবিতা” ও “পুনশ্চে” দীর্ঘ কবিতা।
গুরুদেব তার নিজের বক্তব্যে জানিয়েছেন যে বহু ফুলের বিদেশী কঠিন নাম তিনি মনে রাখতে পারেননা, তাই তাদের তিনি তাঁর মতন করে সুন্দর সুন্দর নাম দিয়েছেন। বাংলা সাহিত্যে রবীন্দ্রনাথ ঠাকুর ছাড়া আর একজন বিখ্যাত সাহিত্যিকও বহু ফুলের নামকরণ করেছেন তার নিজের মতন করে- তিনি হলে বিভূতিভূষণ বন্দ্যোপাধ্যায়। আজকের চর্চা রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরের নামকরণ করা ফুল। গুরুদেবকে আমার শ্রদ্ধার্ঘ্য জানাই তার নামকরণ করা বিভিন্ন ফুলের পুষ্পার্ঘ্যে।🙏🏽🌹
আমার কথায় কোনো ভুল থাকলে তা সংশোধনে আগ্রহী। আবার কোনও নতুন তথ্য পেলে তা সংযোজনেও বিশেষ উৎসাহী। আমার উল্লিখিত প্রতিটি ফুলের চর্চা রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরের গানে, কবিতায় বা গল্পে আছে। কিছু ফুলের চর্চা যেমন ‘হিমঝুরি’ বা ‘বনপুলক’ এর কথা তিনি করেছেন তার চিঠিতে,যার পরিচয় আমরা তাঁর চিঠি-পত্র
পড়লে পাই।
রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরের নামকরণ করা ফুল🌷

১) #হিমঝুরি
বৈজ্ঞানিক নামঃ Milingtonia hortensis.
স্হানীয় নামঃ আকাশ নিম, আকাশ মল্লিগে, ইন্ডিয়ান কর্ক।

২) #নীলমনি
বৈজ্ঞানিক নামঃ Petrea volubilus
স্হানীয় নামঃ Queen’s wreath, Bluebird vine, Sand paper vine

৩) #অগ্নিশিখা
বৈজ্ঞানিক নামঃ Gloriosa superba
স্হানীয় নামঃ উলোটচন্ডাল, Flame lily, Tiger claw, Fire lily.

4) #উদয়পদ্ম
বৈজ্ঞানিক নামঃ Magnolia grandiflora
স্হানীয় নামঃ হিম চাঁপা।

৫) #বনপুলক
বৈজ্ঞানিক নামঃ Pavetta indica

৬) #বাগানবিলাস
বৈজ্ঞানিক নামঃ Bougenvilea
স্হানীয় নামঃ কাগজিফুল।

৭) #অমলতাস
বৈজ্ঞানিক নামঃ Cassia fistula
স্হানীয় নামঃ বাঁদরলাঠি, সোনালু, সানাইল, কর্ণিকা, Golden shower.

৮) #তারাঝরা
বৈজ্ঞানিক নামঃ Clematis gouriana
স্হানীয় নামঃ স্ক্যানেভিয়ান ফুল

৯) #অলকানন্দা
বৈজ্ঞানিক নামঃ Allamanda cathartica
স্হানীয় নামঃ Golden trumpet, Yellow bell.

১০) #গুলঞ্চ
বৈজ্ঞানিক নামঃ Plumeria
স্হানীয় নামঃ গোলক চাঁপা, কাঠ চাঁপা, গরুড় চাঁপা, চালতা গোলাপ।

১১) #পারিজাত
বৈজ্ঞানিক নামঃ Fusca variegata
স্হানীয় নামঃ মান্দার, পালতে মান্দার।

১২) #মধুমঞ্জরী
বৈজ্ঞানিক নামঃ Quisqualis indica
স্হানীয় নামঃ মধুমালতি

১৩) #সোনাঝুরি
বৈজ্ঞানিক নামঃ Accacia auriculiformis
স্হানীয় নামঃ আকাশমনি।

১৪) #পলকজুঁই
বৈজ্ঞানিক নামঃ Clrodenrrum inerme
স্হানীয় নামঃ বন জুঁই।

শান্তিনিকেতনের দুটি আরও বিখ্যাত ফুল আছে যা বসন্তে শান্তিনিকেতনকে আলো করে রাখে ‌, যার স্হানীয় নাম হল #বাসন্তিকা(Tabebuia serratiflora) ও #ফাগুন বৌ (Cochlo sternum)। এ দুটি ফুলের নামকরণ গুরুদেবের করা কিনা তা নিয়েও আমরাও পুরোপুরি নিশ্চিত নই।
এছাড়া গুরুদেবের নামকরণ করা আরও দুটি ফুলের চর্চা পাই যা হল সাঁওতালদের বনজ ফুল, গুরুদেব যাকে বলেছেন #লাঙ্গল ফুল এবং আর একটি হল #বাসন্তী– যাদের সম্বন্ধেও আমাদের জ্ঞান সীমিত।
তবে পৃথিবীতে একই ফুলের বিভিন্ন স্থানীয় নাম আছে, আবার একই নাম বিভিন্ন ফুলের আছে । তবে প্রত্যেকটি ফুলের বৈজ্ঞানিক নাম একটিই হয়। তাই ফুলেদের বৈজ্ঞানিক নামে চেনাটাই বেশি ভালো।

ভালো থাকবেন আর সব্বাইকে ভালো রাখবেন।
—রেখা বন্দ্যোপাধ্যায়—

— একলা বৈশাখ 1428–

— পয়লা বৈশাখ–🙏🏽🙏🏽
— একলা বৈশাখ 1428–


বৈশাখ! তুমি একলা নও
আমরাও সাথে আছি।
নববর্ষে বাড়ির সবাই
এবারও কাছাকাছি।
হয়েছে কি কারো নতুন জামা, ঘুড়তে কি কোথাও যাবে?
না চাইতেও বলতে হচ্ছে ,
থাক না সবাই ঘরে-ঘরে।
সবাই মিশে মিলে-জুলে
খাওগো ঘরের খওয়া।
খাবার জুটুক সবার পাতে
মন্ডা-মিঠাই আর মেওয়া।
থাকুক সবাই ভালো বেসে,
ভালো না বেসো কোরোনাকে।
এই বৈশাখই আসুখ নিয়ে
নতুন আলো দিশা।
গভীর আশার বাণী নিয়ে,
এসেছি তোমার দ্বারে।
মারণ ব্যাধি বিলীন হবে
হাহুতাশ যাবে চলে ।
বৈশাখ! তুমি একলা নও
আমরাও আছি সাথে ।
মোবাইলেই হোক শুভকামনা
যেওনা কারো ঘরে ।
শুভ নববর্ষ 🙏🏽🙏🏽🙏🏽

— রেখা
🥥🍎🍐🍉🍈🍇🥭🍓

मित्रता

 

 

एक दिन एक भैंस घास चरते चरते एक गहन वन में चली गयी । वहाँ एक हिरणी से उसकी भेंट हुई ।

 

गिरनी ने भैंस से पूछा , “ तुम यहाँ कैसे आयी ? और क्यों आयी  ? ”

भैंस ने कहा , “ मैं घास चरते चरते यहाँ आ गयी । यह कौन सी जगह है ?  ”

हिरणी बोली , “ यह जंगल है, यहाँ तरह – तरह के जंगली,  हिंस्र जानवर हैं । यहाँ से भाग निकलना बहुत ही कठिन काम है ।  जल्दी भागो । ”

 

उसकी बात सुनकर भैंस ने कहा , “ लगता है तुम तृण भोजी हो। तुम भी क्या मेरी तरह भटकते – भटकते यहाँ आ गयी हो ?

तो तुम भी चलो मेरे साथ । नहीं तो जानवर तुम्हें भी नोच खाएँगे । हम तृण भोजी एक साथ रहेंगे । “

 

उसकी बात सुनकर हिरणी ने कहा , “ मैं तुम्हारे साथ नही जा सकती ।  मैं तो अरण्य की शोभा हूँ । अगर मैं ही चली जाऊँ तो अरण्य की चंचलता ख़त्म हो जाएगी।  मैं जब लता – गुल्म में आबद्ध हो जाती हूँ , तब वे भी मेरे साथ क्रीड़ा करते हैं ।

कोई अगर हमारे पीछे लग जाए, तो अरण्य में हल – चल मच जाती है ।  ”

 

“लेकिन तुम्हारे जीवन में भी तो ख़तरा है !?”

 

हिरणी ने कहा , “ जीवन है तो जोखिम है, बिना जोखिम के ज़िंदा रहना का आनंद कहाँ ? मैं यहाँ की ख़ुशबू हूँ,  यहाँ का

आनंद हूँ। मैं यहाँ का जीवन हूँ, यौवन हूँ। मैं यहाँ से कैसे जाऊँ । तुम जल्दी जाओ। गोशाला में तुम्हारे बछरे दूध के लिए तरस रहे होंगे । सावधानी से जाओ और अपना कर्तव्य निभाओ । मैं यहीं हूँ । अगर कोई ख़तरा हो, तो मैं, अपनी जान देकर भी तुम्हारी रक्षा करूँगी।  ”

 

“ दोनो बिछर गए परंतु मित्रता बिछरी नही ।। ”

 

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वजूद

१।         

 स्वयं को ऐसा बनाओ ,  जहाँ तुम हो,

  वहाँ तुम्हें सब प्यार करें ।

 

        जहाँ से तुम चले जाओ ,

        वहाँ तुम्हें सब याद कारें ।

 

        जहाँ तुम पहुँचने वाले हो,

        वहाँ सब तुम्हारा इंतज़ार करें ।।

 

२।   

 जीवन में प्रशंसा की तरह निंदा , विश्वास की तरह  अविश्वास का मूल्य है ।

 

३।

साँस पड़ते पड़ते काम ख़त्म करो,

समय रहते रहते वक़्त को मूल्य दो,

जीवन लम्बा नही है, लेकिन वक़्त लम्बा है,

साँस लम्बे तभी हैं, जब वे व्यर्थ हो जाए।

४।

जियो तब तक जब कोई तुम्हें प्यार करे।

वजूद तब तक है जब तक कोई तुम्हारी चर्चा करे।

क्या पता कल तुम हो या नही,

दिखा दो दुनिया को कि आज तुम हो ।

एक बार में न हो तो करो सौ बार,

सको या ना सको , देखो तो एक बार।

अधुना मानव

हे मानव ! तेरा जनम है श्रेष्ठ जनम।

तू कर दिखाया कितना कुछ।

सोच सोच कर कांति चूर।

अपने घेरे में बैठ तु, मचा रहा है निरव क्रांति ।

खो दिया है अपना चैन-शांति ।।

 

तेरे भीतर ठूँस ठूँस कर भरा है,

कितनी अनगिनत पद्धति यांत्रिक ।।

विश्व दुनिया को जीतने के लिए,

चल रहा है तेरा ही दुर्गम अभियान ।

क्योंकि तू है मानव , तू है महान ।।

अरे मूर्ख , देख पहले।

तेरे भीतर जो चोर है बैठा।

जो श्रांति और क्लांति का है कर्ता ।

चूस रहा है जो कांति का ख़ून और जीवन का धुन ।।

निकाल दे उसे पहले, मत सोच, सोच मत।

दूर कर दे उसे तन से , मन से और भंगुर समाज से ।।

जिस दुनिया की अग्रगति के लिए तूने ये जंग रचा,

मानवता का अस्तित्व कहाँ तक है बचा ?

 

हे मानव, श्रांति से नही, शांति से  सजा दे तेरा अभियान ।

‘मानवता का महत्व ’ कितना है मूल्यवान ,

समझा दे सबको।

गाँव से नुक्कर तक,

शहर से नगर तक ।।


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